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History of Bijnor an Indian District

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बिजनौर, हिमालय की उपत्यका में स्थित l जहाँ गंगा पहली बार अपने विस्तार को पाती है , मानों शिव कि जटाओं से बाहर निकलकर उन्मुक्तता का आनंद लेती है l कालिदास का जन्म भले ही कहीं और हुआ हो, किंतु उन्होंने अपने प्रसिद्द महाकाव्य “अभिज्ञान शाकुंतलम” में  इस जनपद में बहने वाली मालिनी नदी को बनाया। जिस महाप्रतापी राजा भरत के नाम पर विश्व भारत को जानता है, यह वही शस्य श्यामला भूमि है जिस राज में पलकर भरत महाप्रतापी बने  । बिजनौर की इस पुण्य भूमि को को जहाँ एक ओर महाराजा दुष्यन्त, परमसंत ऋषि कण्व और महात्मा विदुर की कर्मभूमि होने का गौरव प्राप्त है, वहीं आर्य जगत के प्रकाश स्तम्भ स्वामी श्रद्धानन्द, अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वैज्ञानिक डॉ॰ आत्माराम, भारत के प्रथम इंजीनियर राजा ज्वालाप्रसाद आदि की जन्मभूमि होने का सौभाग्य भी प्राप्त है। बिजनौर जनपद के प्राचीन इतिहास को स्पष्ट करने के लिए बहतु अधिक ऐतिहासिक एवं पौराणिक प्रमाण नहीं मिलते हैं  लेकिन सबसे पहले भूमि का संदर्भ रामायण काल मे आता है । वाल्मीकि रामायण मे इस क्षेत्र को प्रलंब तथा उत्तरी कारापथ कहा गया है । भगवान श...